भारत कब विश्व गुरु बना?

 भारत कब विश्वगुरु था? भारत का प्राचीन नाम जंबो द्वीप था l जम्बो द्वीप में सम्राट अशोक का शासन था lप्रियदर्शी मौर्य सम्राट अशोक के द्वारा तथागत गौतम बुद्ध व इनके धम्म को विश्वव में लोकगुरू के रूप स्थापना के बाद ही भारत विश्व गुरु बना l इसे स्थापित करने का योगदान सम्राट अशोक को ही जाता हैl
हालांकि सम्राट अशोक अपने साम्राज्य के लिए शासन प्रशासन और नीतियों के लिए बहुत ही काबिल व्यक्ति रहा परंतु साथ ही साथ में भारतवर्ष में जब हम बौद्ध धर्म के प्रसार और स्थायित्व की बात करते हैं तो सबसे पहले मौर्य सम्राट अशोक का नाम स्वगर्णिम अक्षरों से लिया जाता है। दीपवंश और महावंश के अनुसार अशोक अपने शासन के चौथे वर्ष ही बौद्ध धम्म में दीक्षित हो गया था। उसने 84 हजार स्तूपों का निर्माण किया। साँची के लघु स्तम्भ लेख से पता चलता है कि बौद्ध संघ में फूट डालने वाले 60,000 भिक्खुओं को संघ से निष्का्षित कर दिया और उनके लिए नियम था वे श्वेत वस्त्र पहनकर किसी अयोग्य स्थान पर रहेंगे। तीसरी बौद्ध संगीति पाटलीपुत्र (पटना) में अशोक द्वारा कराई गयी। इस संगीति की अध्यक्षता मोग्गिलिपुत्त तिष्य ने की थी उसके बाद ही बौद्ध धम्म के अंदर त्रिपिटक स्थापित हुआ जिसमें( सूत्त पिटक, विनय पिटक और अभिधम्म पिटक)। सम्पूर्ण विश्व के इतिहास में अशोक एक मात्र ऐसा उदाहरण था कि जिसने अपने पुत्र महेन्द्र एवं पुत्री संघमित्रा का उनके भरपूर यौवन काल में राज्य एवं सुख-सम्पत्ति या वैभव से न जोड़कर राजपाट छुड़वाकर धम्मविजय एवं धम्म‍प्रसार के लिए संसार के कोने-कोने में भेजा। आज हम प्रमाण के साथ कह सकते हैं कि विश्व मे कई बुद्धिस्ट देश हैं तो उसमें सम्राट अशोक का ही योगदान है। प्रियदर्शी सम्राट अशोक ने ही भगवान बुद्ध को लोक गुरु/ विश्व गुरु में स्थापित कर चुके हैंl

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