एक हिजड़ा की आत्मकथा : मैं हिज़डा ... मैं लक्ष्मी
किसी भी समाज में हिजड़ा शब्द लोक वृत्त में सर्वस्वीकृत मानव नहीं है . यह विडम्बना ही है . उनका जन्म प्रक्रिया एक समान है परन्तु मानव के रूप में स्वीकृति नहीं . क्या इसमें उस व्यक्ति का दोष है या समाज की दृष्टिदोष है यह ? इसी पर कुछ विचार कुछ चिंतन का प्रयास .
सर्वप्रथम हिजड़ा शब्द की उत्पत्ति
‘हिजड़ा’ शब्द मूल उर्दू भाषा का शब्द है। यह
अरेबिक शब्द ‘हिजर’ से आया हुआ है, जिसका अर्थ
होता है-‘अपना समुदाय
छोड़ा हुआ’ अर्थात
स्त्री-पुरुषों के समुदाय से अलग समुदाय का वह व्यक्ति जो न स्त्री है और न पुरुष।
भिन्न-भिन्न भाषाओं में इनके लिए भिन्न-भिन्न शब्द प्रयोग में लाए जाते हैं। मराठी
में ‘छक्का’ तो गुजराती में
उन्हें ‘पावैया’ से संबोधित किया जाता है।
पंजाबी में ‘खुस्रा’ व ‘जनखा’, तेलगू में ‘नपुंसकुडु’, ‘कोज्जा’, ‘मादा’ और तमिल में ‘शिरूरनान’, ‘अली’, ‘अरवन्नी’, ‘अरावनी’, ‘अरुवनी’ आदि शब्द प्रयोग किए जाते हैं।
अंग्रेजी में इसके लिए ‘ट्रांसजेंडर्स’ शब्द का प्रयोग किया जाता है, जिसका अर्थ ‘लिंगभाव से परे’ होता है।
LGBTIQ
टर्म का इस्तेमाल
भिन्न-भिन्न लैंगिक पहचान के लोगों के लिए किया जाता है। Lesbian से
अभिप्राय उस महिला से होता है जो प्रेम,
शादी या सेक्स के लिए
किसी पुरुष की ओर आकर्षित न होकर किसी महिला के प्रति ही आकर्षित होती है। Gay उस
पुरुष को कहते हैं जो किसी महिला की ओर आकर्षित न होकर दूसरे पुरुष की ओर ही
आकर्षित होता है। Bisexual से अभिप्राय उनसे है जो किसी भी लिंग
(स्त्री या पुरुष) के प्रति आकर्षित हो सकते हैं। Transgender
उन्हें कहते हैं जिनका
व्यवहार उनके जन्म के समय के लिंग के विपरित होता है। Intersex से
अभिप्राय उनसे है जिनका जन्म के समय लिंग स्पष्ट नहीं होता है। Queer-Questioning सेअभिप्राय दुविधा में फंसे उन लोगों से है जो अपने
बारे में तय नहीं कर पाते हैं कि उनका आकर्षण पुरुष की ओर है या फिर स्त्री की ओर, उनके
अंदर स्त्री वाले गुण हैं या फिर पुरुष वाले। ये हमेशा उधेड़बुन में खोए रहते हैं।
ऐसे लोगों के लिए ‘Queer (क्विअर) ’शब्द का प्रयोग होता है। (https://navbharattimes.indiatimes.com/education/gk-update/know-the-full-form-and-meaning-of-lgbtiq/articleshow/69053487.cms
; दिनांक : 29.04.2023)
अब यह समुदाय अपनी मानवीय पहचान हेतु लगातार आवाज़ उठा रही है और विभिन्न देशों में इसे स्वीकृति भी मिल रही है . अपनी कलाओं के माध्यम से यह समुदाय अपनी भावनाओं को प्रेषित कर रहा है . इसी कड़ी में "मैं हिजड़ा... मैं लक्ष्मी!" लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी उर्फ़ राजू की आत्मकथा को भी पढ़ने समझने की जरुरत है .
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें