शिक्षा और शिक्षण संस्थान किसी भी देश के विकास के मॉडल को प्रस्तुत करता है। और उस देश की सरकार के दर्शन और चिंतन की ऊँचाई को बताता है। वह मानव होने का जिन्दा प्रणाम होता है और मानुष तत्व को संजोते हुए सभ्यता संस्कृति का परिचायक होता है। jnu निश्चित ही एक ऐसा संस्थान है जिससे देश की ख्याति राष्ट्रीय और अंतरष्ट्रीय स्तर पर है। भारत और भारत सरकार के विकास योजना को लागू करने में jnu का अपना योगदान है। यह किसी से छुपा हुआ नहीं है। jnu हमेशा तर्क, वैज्ञानिक सोच, चिंतन और संवाद-विमर्श के साथ साथ सवालों , विरोध और विचारों के जाना जाता है। हिंसा की बारदात पहली बार ही सुना है। हिंसा की संस्कृति विकास और अमानुषता की संस्कृति है। यह कभी भी और कहीं भी हो उसे उचित तो नहीं कहा जा सकता है। jnu में हिंसा एक शिक्षण संस्थान की संस्कृति के खिलाफ है। यह किसी भी संस्थान के लिए सही नहीं है बल्कि यह संस्थान के प्रशासन, उसकी सुरक्षा व्यवस्था की गलती के साथ साथ सरकार की व्यवस्था की चूक है कि वहां हिंसा की बारदात हुई। आखिर सवाल उठना लाज़मी है कि जहाँ साधारण व्यक्ति नहीं जा सकता है वहां ये असामाजिक तत्व...