संदेश

नवंबर, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गांधीवाद से मुक्ति गाँधी से नहीं

  xka/khokn ls eqfDr xka/kh ls ugha MkW- izoh.k dqekj lgk;d vkpk;Z] fgUnh foHkkx] bfUnjk xka/kh jk"Vªh; tutkrh; fo'ofo|ky; vejdaVd]e/;izns'k&484887   ns'k vktknh ds ve`rdky esa py jgk gSA bl ve`r egksRlo dky esa ifjorZu dk ,d vn~Hkqr Lo:i fn[kkbZ nsrk gSA 21oha lnh dk rhljk n'kd xka/kh t;arh dk 150ok¡ o"kZ jgk gSA xka/kh th ds ;ksxnku ls ns'k&nqfu;k ifjfpr gS vkSj ubZ ih<+h iqu% gqbZA lHkh laLFkkuksa esa ns'k ds gj ;qok esa xka/kh t;arh dh ygj dk mRlkg ns[kus dks feykA orZeku Hkkjr ljdkj ds iz/kkulsod ekuuh; iz/kkuea=h Jh ujsUnz eksnh th us 150oha t;arh ij xka/kh&n'kZu ds dbZ O;kogkfjd i{kksa dks Lohdkj fd;kA Lohdkj gh ugha fd;k cfYd mldks lR;fu"Bk ls vkRelkr dj ^xka/khoknh jktuhfr* dks vizklafxd cuk fn;kA ^xka/khoknh jktuhfr dk udkj vkSj xka/kh&n'kZu dh Lohdk;ZrkA nksuksa gh ckr orZeku Hkkjr esa xka/kh th dks ubZ n`f"V ls ewY;kadu vkSj le>us dh dksf'k'k djrk gSA ;wa dg ldrs gSa fd 21oha lnh e...

21वीं सदी में गाँधी-दर्शन

  21oha lnh esa xka/kh&n'kZu MkW- izoh.k dqekj lgk;d vkpk;Z]fgUnh foHkkx]  bafnjk xka/kh jk"Vªh; tutkrh; fo'ofo|ky;]  vejdaVd] e/;izns'k&48487   ns'k dh vktknh dk ve`rdky py jgk gSA bl ve`r egksRlo dky rd igqaprs&igqaprs ns'k esa dbZ ifjorZu gq, gSaA jk"Vªfirk egkRek xka/kh dh 150oha t;arh eukbZ xbZA ^LoPN Hkkjr LoLFk Hkkjr* dk mn~?kks"k gqvkA tEew d'ehj ls 370 gVk vkSj lj;w rV ij jkeefUnj dk uo fuekZ.k 'kq: gqvk rks efLtn dk u;k Hkwxksy Hkh cukA vkj{k.k dh leh{kk dh gypy gqbZ rks u;k vkj{k.k v/;k; tqM+ x;kA lafo/kku leh{kk dh Hkh 'kqxcqxkgV gqbZA lkekftd ifjorZu gsrq u;h ^jk"Vªh; f'k{kk uhfr 2020* ykxw gqbZA ikB~;Øe dh lajpuk cnyh ijh{kk dk <kapk cnykA vkReijh{k.k ls vfXuijh{k.k&vfXuohj rd dh gypy gqbZA Hkz"Vkpkj eqDr Hkkjr ls ysdj dkaxzsl eqDr Hkkjr dk vfHk;ku 'kq: gqvkA fuHkZjrk ls vkRefuHkZjrk dk liuk vk;kA uksVcanh ls th,lVh vk;kA t; foKku ls t; vuqla/kku dk izcks/ku 'kq: gqvkA pwYg...

एक हिजड़ा की आत्मकथा : मैं हिज़डा ... मैं लक्ष्मी

किसी भी समाज में हिजड़ा शब्द लोक वृत्त में  सर्वस्वीकृत मानव नहीं है . यह विडम्बना ही है . उनका जन्म प्रक्रिया एक समान है परन्तु मानव के रूप में स्वीकृति नहीं . क्या इसमें उस व्यक्ति का दोष है या समाज की दृष्टिदोष है यह ? इसी पर कुछ विचार कुछ चिंतन का प्रयास . सर्वप्रथम हिजड़ा शब्द की उत्पत्ति  ‘ हिजड़ा ’ शब्द मूल उर्दू भाषा का शब्द है। यह अरेबिक शब्द ‘ हिजर ’   से आया हुआ है ,   जिसका अर्थ होता है- ‘ अपना समुदाय छोड़ा हुआ ’ अर्थात स्त्री-पुरुषों के समुदाय से अलग समुदाय का वह व्यक्ति जो न स्त्री है और न पुरुष। भिन्न-भिन्न भाषाओं में इनके लिए भिन्न-भिन्न शब्द प्रयोग में लाए जाते हैं। मराठी में ‘ छक्का ’   तो गुजराती में उन्हें ‘ पावैया ’ से संबोधित किया जाता है। पंजाबी में ‘ खुस्रा ’ व ‘ जनखा ’ , तेलगू में ‘ नपुंसकुडु ’, ‘ कोज्जा ’ , ‘ मादा ’   और तमिल में ‘ शिरूरनान ’ , ‘ अली ’ , ‘ अरवन्नी ’, ‘ अरावनी ’, ‘ अरुवनी ’ आदि शब्द प्रयोग किए जाते हैं। अंग्रेजी में इसके लिए ‘ ट्रांसजेंडर्स ’ शब्द का प्रयोग किया जाता है , जिसका अर्थ ‘ लिंगभाव से परे ’ होता है। LGBTIQ...

अनुवाद के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं

अनुवाद के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं   प्रवीण कुमार pravinkmr05@gmail.com किसी भी समाज के विकास में भाशा की अहम भूमिका होती है। बिना भाशा के प्राणियों का जीवन बहुत ही कठिन है। यूं कहें कि जीवन और भाशा दोनों एक-दूसरे के पयार्य हैं। भाशा सिर्फ अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है बल्कि वह सभ्यता-संस्कृति और इतिहास का भी वाहक है। मनुश्य और मनुश्येत्तर सभी प्राणियों की अपनी भाशा-बोली है। जिसके माध्यम से वह जीवन चर्चा संपन्न करते हैं। औपनिवेषिक काल में जब भारतीय समाज अपनी दयनीय स्थिति को प्राप्त चुका था तब भारतेन्दु का यह वाक्य भारतीय समाज के विकास की रूप रेखा को दिषा दे रहा था- ‘ निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति के मूल। बिनु निज भाशा के मिटे न हिये का सूल।। ’ अर्थात बिना अपनी भाशा के न तो उन्नति हो सकती है और न ही हृदय की भावना ही उजागर हो सकती है। इस आलोक में देखें तो भारतीय समाज की उन्नति हिंदी में निहित है। जिसकी ओर भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के महापुरुशों ने पहले ही संकते कर चुके हैं। प्राचीन काल से लेकर  अधुनातन भारत में अनुवाद कार्य दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। प्राचीन काल में भारतीय प्रा...