हिन्दी भारतीय संविधान में वर्णित राजभाषा है, परन्तु मौखिक हिन्दुस्तान की राष्ट्रभाषा है. भारत की संपर्क भाषा है. राष्ट्रीय की अस्मिता की भाषा है.स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों की अर्जन-उपार्जन की भाषा है. बोध, शोध, अनुभूति-अभिव्यक्ति, अन्वेषण-अनुसंधान की भाषा है. भारत की तरक्की की भाषा है परंतु विडंबना यह है कि हिन्दी बाजार की भाषा तो है उससे राजनीति की भाषा है. आमजन की भाषा है और अकादमिक दुनिया की महज़ एक भाषा है जो पिछड़े वर्ग की है. बुर्जुआ वर्ग की अकादमिक राजनीति का हिस्सा है. भाषा का काम है कार्य को सूचित करना है . लेकिन साहित्य में जिस भाषा का व्यवहार किया जाता है वह सिर्फ अर्थ नहीं बताता है और न ही वह कार्य को ही सूचित करता है . साहित्य की भाषा का कार्य है अनुभूति की अभिव्यक्ति . वह अनुभूति रस का आस्वादन और आनंद हो सकती है और उसकी निर्मिती भी . विचार का सम्प्रेषण भी . आवश्यकता की आपूर्ति भी . मानवीय संस्कृति की विकास यात्रा का चित्रण भी . यूँ भी कह सकते हैं कि भाषा सिर्फ अभिव्यक्ति का माध्यम ही नहीं है बल्कि प्राणियों की विकास यात्रा का आदि और...