पराविद्या और अपराविद्या में अंतर

 पराविद्या और अपराविद्या में अंतर

पराविद्या वह विद्या है जिससे अक्षर ब्रह्म की प्राप्ति होती है  वहीँ अपराविद्या वह विद्या है जिसमें सांसारिक भोग ऐश्वर्य की बात होती है . भारतीय इतिहास में पराविद्या और अपराविद्या को लेकर काफी विरोध का माहौल एक दूसरे के खिलाफ रहा है .खासकर यह औपनिषदिक वेदांत या ब्रह्म विद्या को पराविद्या कहा गया है जो वैदिक कर्मकांड के खंडन में प्रचारित हुई और वेद विद्या अपराविद्या है .वैदिकों य बहुत कल तक उपनिषदों की ब्रह्मविद्या का विरोध किया . दार्शनिक भाषा में वेद विद्या त्रैतवाद है और वेदांत अद्वैतवाद. औपनिषदिक ब्रह्मविद्या के जनक इ क्श्वकुवंशी क्षत्रिय थे और वेद विद्या का जनक ब्राह्मण . 

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