बहुजन दर्शन
समय है हम सब यह महसूस करें कि हम एक हैं। हम बहुजन समाज के प्रबुद्ध व्यक्ति हैं। हम पर जिस प्रकार से अपने परिवार का दायित्व है वैसे ही अपने समाज का भी दायित्व है। हम अपने समाज के अधिकारों के लिए आज खड़े हैं और साथ साथ हैं। यही संकल्प होना चाहिए और हमारी एकता में ही हमारा अधिकार और जीवन मूल्य सुरक्षित है। इसे इस प्रकार से समझिए एक सवर्ण हमेशा सवर्ण होता है और वे हमेशा इसे महसूस भी करते हैं और करवाते भी हैं। उनमें जातीय चेतना भी है और एकता भी। इसलिए उनके अधिकार हमेशा सुरक्षित है और वे गलत होकर भी अपने को सही कर लेता है और हमेशा अपनी सवर्ण जातीय समूह की चेतना को महसूस करते हुए अपनी गलती पर भी जीत हासिल कर लेता है।
उम्मीद है हम सब इसे महसूस करें और अपने संवैधानिक अधिकार और जीवन मूल्यों के लिए एक साथ मिलकर संघर्ष में एकता को जिंदा रखें।
विगत एक दशक में ओबीसी समाज के कुछ साथी कम्फर्ट जोन की तलाश कर आजकल यह सोचने लगे कि जेनरल पोस्ट पर फॉर्म भरेंगे और नौकरी मिल जाएगी। ऐसा हो , अति उत्तम है लेकिन आज तक ऐसा कम हुआ , और अब तो नहीं होगा। वर्तमान परिदृश्य यही कहता है।
बाद बाकि हम सब समझदार हैं। इसलिए पुनः आग्रह, कि एक जुट रहिए।एक दूसरे से बातचीत करिए और सामाजिक समस्याओं को समझिए और सहयोग करिए।
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