घर बे घर
देखो! देखो!
वह निकल पड़ा है
घर से।
पार कर लिया है दहलीज
अब लौट कर
नहीं आ एगा
कहा नहीं जा सकता
आएगा या नहीं!
मगर
उनके पेट में
लग गई है आ ग
आ ग....
जिसमें
झुलस कर वह मर जाएगा।
शायद ऐसा क्यों?
मुझे नहीं पता
मगर याद आ रही है
4पीएम
से 8पीएम
के बीच का चक्र
जिसमें फासला भी है
और फैसला भी।
नहीं
यह तो
जीवन चक्र था जिसमें
वह रोज ही पिस्ता आ रहा है
लेकिन यह तो
8पीएम से 12 ए एम
के बीच का घनी चक्कर है
इसके लपेट में जो आता है
वह बचता नहीं है
करो ! ना! कुछ!
वह पास पास है
उसे दूर करो ना
उससे दूर रहो ना
हुआ तो अच्छा ही
परन्तु चूक हो गया
इस चूक ने किया है
हर बार घर बे घर
उनका क्या ?
शाह है
शाही है
जारशाही और हिटलरशाही भी
उधर तो
सब कुछ है खाली !
थाली है खाली।
बजाओ खूब ताली
जोर से
और जोर से थाली
हम भी! तुम भी! बजाओ
ताकि सुने कोई और आये
और भरी जाये थाली।
@प्रवीण कुमार
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