बौद्ध पूर्णिमा की हार्दिक मंगल कामनाएं!
आज बौद्ध पूर्णिमा है . इतिहास में यह दिन बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है . क्या यह महज़ संयोग है कि बुद्ध का जन्म, बुद्धत्व और महा परिनिर्माण बैशाख पूर्णिमा के दिन ही हुआ . डॉ. भदंत आनंद कौसल्यायन के अनुसार तथागत गौतम बुद्ध का जन्म और बुद्धत्व पीपल के पेड़ के नीचे और महापरिनिर्माण दो शाल बृक्षों के नीचे है. इसलिए बौद्ध संस्कृति में इन दोनों वृक्षों का विशेष महत्व है. प्रकृतिमय जीवन का वचन संभवत: इसी से आया है . बौद्ध संस्कृति में लुम्बिनी , बुद्ध गया और कुशीनगर यह सबसे पवित्र स्थल माना गया है . गौतम बुद्ध ने इस बात पर बल दिया है कि जो कुछ भी कर्म किया जाये उसमें बहुजन की कल्याण की बात हो .
"चरथ भिक्खवे चारिकं बहुजन हिताय बहुजन सुखाय, अत्थय हिताय देवमनुस्संनम| देसेथ भिक्खवे धम्मं आदिकल्यानं मज्झकल्याणम परियोसान कल्याणम सात्थं सव्यज्झनं ब्रह्म चरियं पकसेथ"
अर्थात हे भिक्षुओं बहुत जनों के हित के लिए , बहुत जनों के
सुख के लिए धर्मोपदेश देते हुए विचारों| भिक्षुओं ऐसे धम्म का उपदेश दो, जो आदि
में कल्याण कारक हो, मध्य में कल्याण कारक हो और अंत में कल्याण कारक हो |
भिक्षुओं शब्दों और अर्थों के माध्यम से श्रेष्टतम जीवन की स्थापना करों|
बौद्ध संस्कृति में त्रिसरण, पंचशील , अष्टांगिक
मार्ग . शील प्रज्ञा और समाधी का पालन अनिवार्य है . इस पर विस्तार से कभी .
आप सभी को बौद्ध पूर्णिमा की हार्दिक मंगल
कामनाएं!
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